ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने इतिहास महिलाओं की शॉट पुट F57 इवेंट में 9.81 मीटर का सीजन का सबसे अच्छा थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। साथ ही, 20 साल बाद भारत को पैरा एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक भी मिला।
शर्मिला F57 वर्ग में खेलती हैं, जिसमें पैरों से दिव्यांग खिलाड़ी बैठकर शॉट पुट करते हैं। 15 अगस्त 1986 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में हुआ उनकी मां दृष्टिबाधित हैं। दो साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। 19 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। कई साल तक उन्हें घरेलू हिंसा सहनी पड़ी। एक रात पति ने प्रताड़ित करके उन्हें घर से निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपनी दो बेटियों के साथ अलग हो गईं और बाद में दूसरी शादी की।
उनके दूसरे पति अजीत सिंह ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 30 साल की उम्र के बाद खेल शुरू किया। 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में वह चौथे स्थान पर रही थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार, ग्लासगो 2026 में उन्होंने ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर अपना सपना पूरा कर लिया।


